!! क्षमा !!
हे परमेश्वरि परम भगवती रात और दिन मेरे द्वारा सहस्त्र अपराध हुआ करते है |
मेरा यह दास है ( में आपका दस हु ) ऐसा समझकर तुम मुझ पर कृपा करके मेरे अपराधों को क्षमा करो || १ ||
ना में आवाहन करना जानता हु
ना में विसर्जन करना जनता हु
ना पूजा करना जानता हु
हे परमेश्वरि मेरे अपराधों को क्षमा करो || २ ||
हे सुरेश्वरि मैंने जो मंत्रहीन ( ना में मंत्र को जानता हु )
क्रियाहीन ( ना में क्रियाओ को जानता हु )
भक्तिहीन ( ना में भक्ति के प्रकार को जानता हु )
पूजन किया है वो सब आपकी कृपा और दया से पूर्ण हो || ३ ||
सौ प्रकार के अपराध करने के बाद भी भक्तगण
आपकी शरण में आकर सिर्फ "जगदम्बा"
बोलकर भी गति को प्राप्त करते है,
उसे ब्रह्मा आदि देवगण भी प्राप्त करने में असमर्थ है || ४ ||
हे जगदम्बिके में अपराधी हु तुम्हारी शरण में आया हु |
में दयापात्र हु | तुम जैसा चाहो करो || ५ ||
मुझसे अज्ञानवश जो भी अपराध हुआ है
उसे आप क्षमा करो और मुझपर प्रसन्न हो || ६ ||



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