Posts

चेतना

Image
  चेतना (Chetna) एक बहुत महत्वपूर्ण और गहरे अर्थ वाला शब्द है, जिसका प्रयोग हिंदी में आमतौर पर "सचेतता" या "जागरूकता" के संदर्भ में किया जाता है। यह शब्द व्यक्ति की मानसिक और आत्मिक स्थिति को दर्शाता है, जब वह अपने आसपास की दुनिया, अपनी सोच, और अपने अस्तित्व को समझने और महसूस करने की स्थिति में होता है। चेतना के विभिन्न पहलू हो सकते हैं: 1. मानसिक चेतना (Mental Consciousness): यह चेतना का वह रूप है जो व्यक्ति को अपने विचारों, भावनाओं, और मानसिक प्रक्रियाओं से अवगत कराता है। जब हम जागरूक होते हैं कि हम क्या सोच रहे हैं, क्या महसूस कर रहे हैं, और क्या कर रहे हैं, तो यह मानसिक चेतना का हिस्सा है। उदाहरण: "मैं पूरी तरह से अपनी वर्तमान स्थिति की चेतना में हूँ।" (यहाँ व्यक्ति अपनी मानसिक स्थिति के बारे में पूरी तरह से अवगत है।) 2. आध्यात्मिक चेतना (Spiritual Consciousness): आध्यात्मिक दृष्टिकोण से चेतना का मतलब केवल शारीरिक और मानसिक नहीं, बल्कि आत्मा की जागरूकता भी है। यह एक उच्चतम अवस्था है जहाँ व्यक्ति आत्म-ज्ञान, सत्य, और ईश्वर के साथ अपने संबंध को...

!! क्षमा !!

Image
  हे परमेश्वरि परम भगवती रात और दिन मेरे द्वारा सहस्त्र अपराध हुआ करते है |  मेरा यह दास है ( में आपका दस हु ) ऐसा समझकर तुम मुझ पर कृपा करके मेरे अपराधों को क्षमा करो || १ ||  ना में आवाहन करना जानता हु  ना में विसर्जन करना जनता हु  ना पूजा करना जानता हु  हे परमेश्वरि मेरे अपराधों को क्षमा करो || २ || हे सुरेश्वरि मैंने जो मंत्रहीन ( ना में मंत्र को जानता हु ) क्रियाहीन ( ना में क्रियाओ को जानता  हु ) भक्तिहीन ( ना में भक्ति के प्रकार को जानता हु ) पूजन किया है वो सब आपकी कृपा और दया से पूर्ण हो || ३ ||  सौ प्रकार के अपराध करने के बाद भी भक्तगण  आपकी शरण में आकर सिर्फ "जगदम्बा" बोलकर भी गति को प्राप्त करते है, उसे ब्रह्मा आदि देवगण भी प्राप्त करने में असमर्थ है || ४ ||  हे जगदम्बिके में अपराधी हु तुम्हारी शरण में आया हु | में दयापात्र हु | तुम जैसा चाहो करो || ५ ||  मुझसे अज्ञानवश जो भी अपराध हुआ है  उसे आप क्षमा करो और मुझपर प्रसन्न हो || ६ ||  सच्चिदानन्दस्वरूपा परमेश्वरि जगन्माता परमेश्वरि |  आप प्रेमपूर...